मरीज़े- मुहब्बत को तू चाहिए है


नज़र को तेरी
जुस्तजू चाहिए है
नहीं और कुछ 
आरज़ू चाहिए है

समंदर जज़ीरे 
फलक चाँद सूरज
तुम्हारी महक 
कू- ब- कू चाहिए है


मुझे इश्क़ करने 
को सूरत कोई सी
तुम्हारी तरह 
हू- ब- हू चाहिए है

दुआ ही नहीं कुछ 
असर भी मिले अब
मरीज़े- मुहब्बत 
को तू चाहिए है
Previous
Next Post »