हिंदी शायरी

बहकते हुए फिरतें हैं कई लफ्ज़ जो दिल में दुनिया ने दिया वक़्त तो लिखेंगे किसी रोज़....

Monday, April 25, 2016

मेरे ही हाथों पर लिखी है तकदीर मेरी,,,,
और मेरी ही तक़दीर पर मेरा बस नहीं चलता....!!


फिक्र क्यों करता है जो तेरे पास कुछ नहीं,,
तैर तो वो भी जाते है जिनके पास नाव नहीं..!!


लेती नहीं दवाई "माँ" जोड़े पाई-पाई "माँ"।
दुःख थे पर्वत, राई "माँ" हारी नहीं लड़ाई "माँ"।

इस दुनियां में सब मैले हैं किस दुनियां से आई "माँ"।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे गरमा गर्म रजाई "माँ" ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े करती है तुरपाई "माँ" ।
बाबू जी तनख़ा लाये बस लेकिन बरक़त लाई "माँ"।

बाबूजी थे सख्त मगर  माखन और मलाई "माँ"।
बाबूजी के पाँव दबा कर सब तीरथ हो आई "माँ"।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे मां जी, मैया, माई, "माँ" ।
सभी साड़ियाँ छीज गई थीं मगर नहीं कह पाई "माँ" ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे देती रही दुहाई "माँ"।
बाबूजी बीमार पड़े जब साथ-साथ मुरझाई "माँ" ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर बड़े सब्र की जाई "माँ"।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते  रह गई एक तिहाई "माँ" ।

बेटी रहे ससुराल में खुश सब ज़ेवर दे आई "माँ"।
"माँ" से घर, घर लगता है घर में घुली, समाई "माँ" ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची  पर उसकी ऊँचाई "माँ" ।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो याद हमेशा आई "माँ"।

घर के शगुन सभी "माँ" से है घर की शहनाई "माँ"।
सभी पराये हो जाते हैं होती नहीं पराई "माँ"






इस अजनबी सी दुनिया में,अकेला इक ख्वाब हूँ ! 
सवालों से खफ़ा,चोट सा जवाब हूँ ! 
जो ना समझ सके,उनके लिये "कौन ! 
जो समझ चुके,उनके लिये किताब हूँ !!



ए हवा ! तू लेकर उनको,मेरे पास आती क्यों नहीं।
मेरी आँखों से बरसता है जो सावन,वो उन आँखों से बरसता क्यों नहीं ।।
क्यों ये सर्द ठंडी हवाएं,आकर मुझे तड़पती है।
पतझड़ की तरह बहारे सभी,मुझसे रूठ कर चली क्यों जाती है।
सूखता आँखों का दरिया कहने लगा कहाँ हो तुम? कहाँ हो तुम?
आ जाओ लौटकर, जहाँ हो तुम ।।


एहसास हर पल मुझे तुम्हारा है।
मेरी सांसों पर बस नाम तुम्हारा है।।
प्यासे है नयन, दीदार को तेरे,
कहाँ हो तुम? कहाँ हो तुम ?
आ जाओ लौटकर,जहाँ हो तुम ।।


खामोशियां मेरे दिल की ,अब शोर मचाती है।
हर तरफ ,हर अक्ष में,तस्वीर तेरी नज़र आती है।।
खुशबू बनकर तुम ,मुझमें समाए रहते हो।
ना जाने कौन-सी है वो दुनिया,जहाँ तुम रहते हो ।।
दिल तड़पकर अब कहने लगा ,कहाँ हो तुम ? कहाँ हो तुम?
आ जाओ लौटकर, जहाँ हो तुम ।।






Sunday, April 24, 2016

जरुरत लगती नहीं मुझको तेरी तारीफ़ करने की,,,,
 मैं ही लाया हूँ तुम्हे लाखों में से चुन के..!!



सिर्फ दो ही वक़्त पर तेरा साथ चाहिए,,
एक तो अभी और एक हमेशा के लिये..


Saturday, April 23, 2016

 
सुन ऐ ज़िन्दगी,,,,
मुझे भी शामिल करले ना महफ़िलो में अपनी,,,,
हसरत हैं कुछ लम्हों की ख़ुशी मिल जाये..!!



गर तू इज़ाज़त दे एक गुजारिश हैं,,
तेरी बाँहो में एक लम्हा 
"अरसे " की तरह बिताने की ख्वाईश हैं..!!



शायद कुछ दिन और लगेंगे ज़ख़्मे-दिल के भरने में,,,,

जो अक्सर याद आते थे वो कभी-कभी याद आते हैं....!!


Friday, April 22, 2016


हालात चाहे जो हो हमारे दरमियाँ,,,
इबादत हम तेरी करते है...करते रहेंगें...!!


ज़िन्दगी प्यारी और बहुत प्यारी है पर... 
सिर्फ तब तक जब तक मैं तेरा और तूँ सिर्फ मेरी है....!!


Thursday, April 21, 2016


आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है..
ज़िंदगी भर वो सदाएँ पीछा करती हैं!
आदमी जो देता है, आदमी जो करता है..
रास्ते मे वो दुआएँ पीछा करती हैं!



तेरे प्यार में इस कदर फना है प्रिये,
की अब तो छत पे बैठा बंदर भी मूत दे,
तो बारिश समझ कर भीगने लगते है.grin.png grin.pnggrin.png

(बेरोजगार) tongue.png grin.png


Tuesday, April 19, 2016


रोना चाहे रो ना पाये दिल कितना मज़बूर है,,,
किसे पता है कौन बताये रब को क्या मंज़ूर है ..!!



छू ना सकूं आसमान तो ना ही सही दोस्तों…
आपके दिल को छू जाऊं बस इतनी सी तमन्ना है..!


तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो,,
मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है..


हम मरना भी उस अंदाज़ में पसंद करते है,,,,,,,
जिस अंदाज में लोग जीने के लिये तरसते है.....!!



ढूंढते हो क्या आँखों में कहानी मेरी….
खुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी…..


Sooni zindagi main hulchul mehsus hui….
Bejan se dil ki aaj dhadkan tej hui ,
Jane kyon abhi aisa laga..
Shayad apko bhi humari kami mehsoos hui…


Kya kami thi meri mohabbat me...
jo mile wo kisi aur ko...
bas sath hi to manga tha...
woh bhi naseeb na hua mujh jaise badnaseeb ko...




Pyaar Mein Milna Zaruri Nahi,
Pyaar Mein Izhaar Bhi Zaruri Nahi,
Zaruri Sirf Ehsaas Hai Jo Zindagi Sawarde,
Unhe Paana Ya Na Pana Zaruri Nhi


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